#WATCH | कर्नाटक कांग्रेस के विधायक रविकुमार गौड़ा का बयान, 'हम असली हिन्दू हैं, भाजपा नकली हिन्दू है'

कर्नाटक के मांड्या से कांग्रेस के विधायक रविकुमार गौड़ा ने हाल ही में विवादित बयान देते हुए भाजपा को 'नकली हिन्दू' कहा। उन्होंने अपने क्षेत्र में किए गए कामों की प्रशंसा की और यह दावा किया कि वे 'असली हिन्दू' हैं। इस बयान ने राज्य में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। भाजपा ने इस बयान की निंदा की, जबकि कांग्रेस ने कहा कि यह गौड़ा की निजी राय है। सोशल मीडिया पर इस बयान पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी गईं।

Jan 29, 2024 - 22:23
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#WATCH | कर्नाटक कांग्रेस के विधायक रविकुमार गौड़ा का बयान, 'हम असली हिन्दू हैं, भाजपा नकली हिन्दू है'

कर्नाटक: कर्नाटक के मांड्या से कांग्रेस के विधायक रविकुमार गौड़ा (गणिग) ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान दिया है जिसमें उन्होंने बीजेपी को 'नकली हिन्दू' कहा है। गौड़ा का यह बयान हनुमान ध्वज हटाने के विवाद के बीच आया है। उन्होंने कहा, "हमने पिछले छह महीनों में मांड्या में शानदार काम किया है। यह वोक्कालिगा बेल्ट है... उन्होंने देखा कि एक और वोक्कालिगा नेता उभर रहा है, और उन्होंने मुझे निशाना बनाया। हम भारतीय ध्वज फहराते हैं, कोई और ध्वज नहीं। मैं एक गर्वित भारतीय हूँ...वे (भाजपा) नकली हिन्दू हैं, हम असली हिन्दू हैं।"

राजनीतिक तनाव में वृद्धि

गौड़ा के इस बयान ने राज्य में राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। भाजपा ने इस बयान की कड़ी निंदा की है और इसे धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास बताया है। भाजपा नेताओं ने गौड़ा के बयान को 'ध्रुवीकरण की राजनीति' का हिस्सा बताया और कांग्रेस पर राज्य में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का आरोप लगाया।

कांग्रेस का पक्ष

इस बयान पर कांग्रेस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि रविकुमार गौड़ा का बयान उनकी निजी राय है और पार्टी भारतीयता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को महत्व देती है। पार्टी ने यह भी कहा कि वे हर धर्म और समुदाय के प्रति सम्मान रखते हैं और उनका उद्देश्य सामाजिक समरसता बनाए रखना है।

सामाजिक मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

रविकुमार गौड़ा के बयान पर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोगों ने उनके बयान को साहसिक और स्पष्टवादी बताया, जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक और विभाजनकारी करार दिया है।

राजनीतिक विश्लेषण

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं और इससे सामाजिक समरसता में बाधा उत्पन्न हो सकती है। वे यह भी कहते हैं कि ऐसे बयान चुनावी राजनीति में धार्मिक पहलुओं को बढ़ावा दे सकते हैं, जो दीर्घकालिक रूप से सामाजिक संतुलन के लिए हानिकारक हो सकता है।

इस बयान के परिणामस्वरूप, कर्नाटक की राजनीति में आने वाले समय में और भी कई परिवर्तन हो सकते हैं। यह घटना न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बहस का विषय बन गई है।

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